Rahul Gandhi Congress

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FLOP ** (News Rating Point) 18.04.2015

अंततः अपनी रहस्यमयी यात्रा के बाद राहुल गांधी भारत वापस लौट ही आये. साथ ही उन नेताओं ने भी राहत की सांस ली, जिनसे मीडिया राहुल गांधी के लौटने की तारीख पूछता था. लेकिन इससे पहले कभी कैप्टेन अमरिंदर सिंह तो कभी शीला दीक्षित ने राहुल गांधी को नेतृत्व देने पर सवाल उठाये. पार्टी राहुल समर्थक और राहुल विरोधियों के बीच बंटी नज़र आयी.

राहुल गांधी को कांग्रेस अध्यक्ष बनाए जाने के खिलाफ आवाजें मुखर होने लगी हैं. कांग्रेस नेता अमरिंदर सिंह ने शनिवार को कहा कि कांग्रेस का नेतृत्व सोनिया गांधी के पास ही रहना चाहिए, क्योंकि नेतृत्व का बदलाव चाकू के बल पर नहीं हो सकता. 10 साल में आप जहाज के कैप्टन नहीं बन सकते. सिंह ने कहा, राहुल को और अनुभव की जरूरत है. लौटने के बाद उन्हें अधिक से अधिक लोगों से संपर्क करना चाहिए. आपको व्यक्तिगत रूप से देश भर के लोगों से मिलकर अनुभव लेना होगा और एक-एक आदमी से संपर्क बनाए रखना होगा. उन्होंने जोर देकर कहा कि लोगों को अनुभव लेकर ऊपर उठना चाहिए क्योंकि अपरिपक्व लोग ऊपर नहीं जा सकते. वह सोनिया गांधी को अध्यक्ष बने रहने के लिए उठ रहे स्वरों से जुड़े सवाल का जवाब दे रहे थे.
दैनिक जागरण
भूमि अधिग्रहण बिल से जुड़े अध्यादेश और किसान हितों के मुद्दे पर कांग्रेस मोदी सरकार पर एक बार फिर हमले की तैयारी में है. राहुल गांधी 19 अप्रैल को ऐतिहासिक रामलीला मैदान पर आयोजित होने वाली किसान रैली में मोदी सरकार पर जोरदार हमला बोलेंगे. सूत्रों के अनुसार लंबी छुट्टी पर गए राहुल के लौटने के बाद उनकी पहली पब्लिक अपीयरेंस की तैयारी में कांग्रेस जुटी हुई है. जहां सोनिया समेत पार्टी के कई नेता इस रैली को संबोधित करेंगे, लेकिन असली हमला राहुल गांधी ही बोलेंगे.
नवभारत टाइम्स
Congressmen who have been going to great lengths to defend Rahul Gandhi’s extraordinary “leave of absence” have just gone farther: about 7,000 km and over 1,100 years. Mukul Sangma, the Chief Minister of Meghalaya, told The Sunday Express that Rahul’s contemplation in solitude — now 45 days long and counting — was like the medieval English king Alfred’s mysterious disappearance after defeat in battle, an absence from which he had come out stronger and more successful.
– The Indian Express
राहुल गांधी को पार्टी अध्यक्ष बनाने पर सवाल खड़ा करने वालों में लोकसभा में उपनेता अमरिंदर सिंह, पार्टी महासचिव अंबिका सोनी व प्रवक्ता संदीप दीक्षित के बाद मंगलवार को दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित भी शामिल हो गईं. दरअसल, सोनिया समर्थक राहुल के राजनीतिक अनुभव को निशाना बनाकर उनकी ताजपोशी रोकने को मुखर विरोध कर रहे हैं, जबकि ‘टीम राहुल’ उन्हें वापसी के साथ अध्यक्ष बनाने को आतुर है. शीला ने राहुल के नेतृत्व पर सवाल उठाते हुए कहा, ‘राहुल का कद बढ़ सकता है, लेकिन हमें एक बात समझनी चाहिए कि सोनिया गांधी का नियंत्रण और नेतृत्व बहुत सफल रहा है. राहुल के मामले में, निश्चित तौर पर प्रश्नचिन्ह लगा है. आपने अब तक उनका प्रदर्शन नहीं देखा है.’ हालांकि बाद में उन्होंने कहा कि उनके कहने का आशय था, ‘सोनिया गांधी एक अच्छी अध्यक्ष हैं, जबकि ‘राहुल गांधी एक अच्छे प्रधानमंत्री साबित होंगे.’
दैनिक जागरण
Another date missed, another date given- Cong Now Says Rahul To Return By TomorrowRahul Gandhi is expected to return from his sabbatical by Wednesday when his temporary break from political life clocks 55th day. Congress sources gave the fresh schedule for Rahul’s return after the wait on Monday proved futile. It was earlier indicated that the party vicepresident would be back from his sabbatical on April 12-13.
– The Times of India
बाबासाहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर की विरासत बचाकर रखने में जुटी कांग्रेस की कोशिश पर राहुल गांधी की गैर मौजूदगी भारी पड़ रही है. बाबासाहेब की 125वीं जयंती को साल भार जोर शोर से मनाने के लिए गठित उच्च स्तरीय समिति के सह-संयोजक होने के बावजूद राहुल के बैठक से नदारद रहने पर विवाद छिड़ गया है. मध्य प्रदेश में बाबासाहेब की जन्मस्थली महू में 14 अप्रैल के जयंती कार्यक्रम में भी राहुल के शिरकत करने की बात थी. मगर वहां भी वह गायब रहेंगे. वहां सुशील कुमार शिंदे जाएंगे.
अमर उजाला
कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी को अध्यक्ष बनाने की मांग पर असहमति जताने वाले अमरिंदर सिंह को जवाब देने के लिए कई पार्टी नेता मैदान में उतर आए हैं. सचिन पायलट, अजित जोगी, अशोक तंवर और के राजू जैसे पार्टी नेताओं ने सोमवार को राहुल को अध्यक्ष बनाए जाने की पुरजोर वकालत की.
अमर उजाला
Rahul Gandhi, scion of India’s political dynasty, returns home after mystery absence- India’s prodigal son has returned. Rahul Gandhi, the 44-year-old scion of India’s premier political dynasty, returned to New Delhi Thursday after a mystery leave of absence that sparked weeks of speculation about his whereabouts. The telegenic, dimple-cheeked Gandhi, who led his party to a resounding defeat at the polls last May, had taken what was supposed to be a two-week sabbatical to contemplate the political future. But in the end, two weeks stretched into 57 days. Rumors flew — Gandhi was at a meditation retreat in Burma; he was in Bangkok, Cambodia, London, Italy.  “Missing” posters appeared in his home parliamentary district.
– The Washington Post
Rahul’s back, amid cheers and some doubts in Cong- Rahul Gandhi returned home on Thursday to some drummed up celebration as well as some trepidation in certain quarters of the Congress over whether his return would mean him succeeding mother Sonia Gandhi as the Congress chief.
– The Times of India

[box type=”info” icon=”https://newsratingpoint.com/wp-content/uploads/2015/04/xx-Captain-Amarinder-Singh-Congress.jpg”]पंजाब के पूर्व सीएम अमरिंदर सिंह ने कहा है कि अध्यक्ष पद के लिए राहुल को और अनुभव की जरूरत है. उन्हें छुट्टी से लौटने के बाद देश में घूमना चाहिए. अमरिंदर सिंह के अनुसार सोनिया गांधी अकेले ही पार्टी चलाने के लिए काफी हैं और उन्हें अध्यक्ष बने रहना चाहिए. वहीं राहुल को उपाध्यक्ष पद पर ही रहना चाहिए. अमरिंदर यहीं नहीं रुके. उन्होंने कहा कि राहुल को 10 साल में ही जहाज का कप्तान नहीं बनाया जा सकता है. उन्होंने बताया कि राहुल को वापस आने के लिए ई-मेल भेजा था. उसका जवाब नहीं मिला. (अमर उजाला)[/box]

[box type=”info” icon=”https://newsratingpoint.com/wp-content/uploads/2015/04/xx-Sheila-Dixit-Congress.jpg”]दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित ने राहुल की दावेदारी पर सवाल उठाया है. मंगलवार को शीला दीक्षित ने कांग्रेस की कमान सोनिया के हाथों में रहने की वकालत की. दरअसल पार्टी के तमाम सीनियर नेताओं की ओर से राहुल के हाथों कमान सौंपने को लेकर कहीं न कहीं हिचक बाकी है. कांग्रेस में लीडरशिप को लेकर बीच बीच में दो खेमे सिर उठाते दिखाई देते हैं. ये खेमे सीनियर व युवा नेताओं के हैं. (नवभारत टाइम्स)[/box]

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